पं.मुकुटधर पांडेय के काव्य की पृष्ठभूमि: डाँ. बलदेव
मुकुटधर पाण्डेय के काव्य की पृष्ठभूमि *****************************डाँ०बलदेव पंडित मुकुटधर पाण्डेय संक्रमण काल के सबसे अधिक सामथ्यर्वान कवि हैं। वे व्दिवेदी-युग और छायावाद के बीच की ऐसी महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जिनकी काव्य यात्रा को समझे बिना खड़ी बोली काव्य के दूसरे-तीसरे दशक तक के विकास को सही रूप से नहीं समझा जा सकता। उन्होंने व्दिवेदीयुग के शुष्क उद्यान में नूतन सुर भरा तथा नव बसन्त की अगवानी कर के युग-प्रवर्तन का ऐतिहासिक कार्य किया। मुकुटधर पाण्डेय जी जीवन की समग्रता के कवि हैं। उनके काव्य में प्रसन्न और उदास दोनों पक्ष के छायाचित्र हैं। प्रकृति के सौन्दर्य में अलौकिक सत्ता का आभास मिलता है, उसके प्रति कौतूहल उनमें हर कहीं विद्ममान है। यदि एक ओर उनके काव्य में अंतस्सौंदय की तीव्र एवं सूक्ष्मतम अनुभूति, समर्पण और एकान्त साधना की प्रगीतात्मक अभिव्यन्जना है, तो दूसरी ओर व्दिवेदीयुगीन प्रासादिकता और लोकहित का आर्दश। महाकवि निराला ने इन्हीं विशेषताओं के कारण उन्हें मार्जित कवि कहा है। उनके शब्दों में इस जमाने और सनेही जी के जमाने के ...

Comments
Post a Comment