बसन्त राघव की दो कविताएं

बसन्त राघव की दो कविताएं
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प्रेम कथा
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उसकी नंगी पीठ पर
मैं लिखता रहा
सिर्फ और सिर्फ
तुम्हारा नाम
वह बर्दाश्त करती रही
मेरी बेवफाई
जबकि वह प्रेम करती रही
मुझसे
और मैं
पेड से नहीं
आकाश नापती हुई
चिडिया से
प्रेम करता रहा ।
     ***
मैं मरा नहीं
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उसके गोली दागने के पहले
मैंने उसकी आंखों में झांका
वह बेहद डरा हुआ था
उसने चुरा लिए थे
मेरे सारे हथियार ,गोला ,बारूद
लेकिन मेरे भीतर बहुत भीतर
विराजमान थीं
भगतसिंह और चंद्रशेखर आजाद
की आत्माएं
मैं मरा नहीं
अमर हो गया ।
        ***
बसन्त राघव
पंचवटी नगर, बोईरदादर
रायगढ़, छत्तीसगढ़
मो.नं.8319939396

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